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पीएम विश्वकर्मा योजना 2026: 3 लाख तक का सस्ता लोन, ₹15,000 टूलकिट और फ्री ट्रेनिंग, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

प्रकाशन: 8 अक्टूबर, 2026 • अद्यतित: 15 अक्टूबर, 2026 • लेखक: योजनाए संपादकीय टीम
पीएम विश्वकर्मा योजना 2026: 3 लाख तक का सस्ता लोन, ₹15,000 टूलकिट और फ्री ट्रेनिंग, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

भारत सरकार द्वारा देश के पारंपरिक शिल्पकारों, दस्तकारों और श्रमजीवियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा उनके पुश्तैनी हुनर को आधुनिक बाजार और वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से पीएम विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Scheme) का राष्ट्रव्यापी संचालन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितंबर 2023 को विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर 13,000 करोड़ रुपये के पूर्ण केंद्रीय बजट आवंटन के साथ इस ऐतिहासिक योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना का प्राथमिक विजन सदियों पुरानी ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ के तहत अपने हाथों और पारंपरिक औजारों से आजीविका चलाने वाले कारीगरों की उत्पादकता, कार्यक्षमता और पारिवारिक आय में क्रांतिकारी बदलाव लाना है।

इस योजना के तहत पात्र कारीगरों को बिना किसी जमानत या गारंटी (Collateral-Free) के अत्यंत रियायती 5% ब्याज दर पर कुल ₹3,00,000 तक का संस्थागत ऋण प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही, कौशल उन्नयन के लिए निःशुल्क आधुनिक प्रशिक्षण, प्रशिक्षण के दौरान ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड तथा आधुनिक टूलकिट खरीदने हेतु ₹15,000 का डिजिटल ई-वाउचर अनुदान सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में दिया जाता है। केंद्र सरकार की अन्य महत्वाकांक्षी पहलों जैसे हमारी हालिया विस्तृत गाइड पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की तरह ही, यह योजना भी शत-प्रतिशत पारदर्शी और डीबीटी आधारित है। यदि आप भी किसी पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े हैं, तो हमारी इस आधिकारिक योजना गाइड में पात्रता, लाभ और आवेदन की पूरी प्रक्रिया को विस्तारपूर्वक समझें।

योजना क्या है? (Scheme Overview & Objective)

पीएम विश्वकर्मा योजना केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of MSME) द्वारा संचालित एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है। इसमें कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) तथा वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS, वित्त मंत्रालय) संयुक्त रूप से सहभागी हैं। पारंपरिक कारीगर भारत की ग्रामीण और अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन आधुनिक मशीनों, कार्यशील पूंजी की कमी और बाजार तक सीधी पहुंच न होने के कारण वे आर्थिक रूप से पिछड़ रहे थे।

इस योजना का मूल उद्देश्य विश्वकर्मा भाई-बहनों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में शामिल करना, उन्हें डिजिटल भुगतान और आधुनिक तकनीकों में पारंगत बनाना तथा उनकी कलाकृतियों और उत्पादों को बड़े बाजारों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ना है। इसके माध्यम से कारीगर न केवल आत्मनिर्भर बनते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के अवसर भी सृजित करते हैं।

पीएम विश्वकर्मा योजना के मुख्य लाभ (Key Scheme Benefits)

पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत पंजीकृत लाभार्थियों को सरकार द्वारा निम्नलिखित 5 प्रमुख स्तंभों पर आधारित वित्तीय व तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है:

  • राष्ट्रीय मान्यता व आधिकारिक पहचान: प्रत्येक पंजीकृत शिल्पकार को ‘पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र’ (Digital Certificate) और क्यूआर कोड युक्त डिजिटल पहचान पत्र (ID Card) प्रदान किया जाता है, जो उनकी व्यावसायिक पहचान को पूरे देश में प्रमाणित करता है।
  • कौशल उन्नयन व दैनिक स्टाइपेंड: आधुनिक तकनीकों, नए डिजाइनों और औजारों के कुशल उपयोग के लिए 5 से 7 दिनों का बुनियादी प्रशिक्षण तथा 15 या उससे अधिक दिनों का उन्नत प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण अवधि में प्रतिदिन ₹500 का वित्तीय भत्ता सीधे बैंक खाते में जमा किया जाता है।
  • टूलकिट प्रोत्साहन अनुदान: बुनियादी कौशल प्रशिक्षण के मूल्यांकन के बाद आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण उपकरण और टूलकिट खरीदने के लिए ₹15,000 का डिजिटल ई-रूपी (e-RUPI) वाउचर प्रदान किया जाता है।
  • संपार्श्विक-मुक्त सस्ता ऋण (Collateral-Free Credit): बिना किसी संपत्ति या गारंटर के 5% की रियायती ब्याज दर पर दो आसान चरणों में कुल ₹3,00,000 का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। शेष 8% ब्याज सब्सिडी सरकार सीधे बैंकों को भुगतान करती है।
  • डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन (Digital Incentives): डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक पात्र डिजिटल लेनदेन पर ₹1 का प्रोत्साहन (प्रतिमाह अधिकतम 100 लेनदेन तक ₹100) लाभार्थी के खाते में भेजा जाता है।

कौन आवेदन कर सकता है? (Who is Eligible?)

पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक का किसी पारंपरिक हस्तकला अथवा औजार-आधारित व्यवसाय से जुड़ा होना अनिवार्य है। यह योजना मुख्य रूप से उन कारीगरों के लिए तैयार की गई है जो असंगठित क्षेत्र में स्वरोजगार के आधार पर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

योजना का लाभ एकल परिवार (पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे) के केवल एक सदस्य को ही दिया जा सकता है ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता का विस्तार सुनिश्चित किया जा सके।

पात्रता की अनिवार्य शर्तें (Mandatory Eligibility Criteria)

पीएम विश्वकर्मा योजना में पंजीकरण कराने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आप निम्नलिखित सभी आधिकारिक पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं:

  • न्यूनतम आयु: पंजीकरण की तिथि पर आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष पूर्ण होनी चाहिए। योजना के तहत कोई अधिकतम आयु सीमा लागू नहीं है।
  • पारंपरिक व्यवसाय में सक्रियता: आवेदक ऊपर दी गई 18 अधिसूचित पारंपरिक श्रेणियों में से किसी एक में स्वरोजगार के आधार पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हो।
  • पूर्व ऋण सीमा प्रतिबंध: आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य ने पिछले 5 वर्षों में केंद्र अथवा राज्य सरकार की समान क्रेडिट-आधारित योजनाओं जैसे पीएमईजीपी (PMEGP), पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) अथवा मुद्रा (Mudra) योजना के तहत कोई व्यावसायिक ऋण न लिया हो। यदि पूर्व लिया गया ऋण पूर्णतः चुकता हो चुका है, तो वे आवेदन के पात्र होंगे।
  • सरकारी कर्मचारियों पर प्रतिबंध: केंद्र अथवा राज्य सरकार के नियमित कर्मचारी, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य इस योजना के लिए पूरी तरह अपात्र हैं।
  • एक परिवार, एक लाभार्थी: परिवार के किसी भी एक सदस्य को ही प्रमाण पत्र, टूलकिट और ऋण सहायता का लाभ मिल सकता है।

किन पारंपरिक व्यवसायों/कारीगरों को लाभ मिलता है? (18 Eligible Trades)

केंद्र सरकार ने प्राथमिक चरण में 18 पारंपरिक शिल्पों को सूचीबद्ध किया है। इन सभी व्यवसायों का आधिकारिक विवरण नीचे तालिका में प्रस्तुत है:

क्र.सं. कारीगर वर्ग (Trade Name) शिल्प का प्रकार / कार्य का विवरण
1 बढ़ई (Carpenter / Suthar) लकड़ी के फर्नीचर, चौखट, दरवाजे और पारंपरिक घरेलू उत्पाद बनाने वाले
2 नाव निर्माता (Boat Maker) पारंपरिक लकड़ी की नावें और जल-यातायात उपकरण तैयार करने वाले
3 अस्त्र निर्माता (Armourer) पारंपरिक औजार, धारदार कृषि उपकरण और धातु के औजार बनाने वाले
4 लोहार (Blacksmith) लोहे की भट्टी पर गर्म लोहे को आकार देकर कृषि व घरेलू वस्तुएं बनाने वाले
5 हथौड़ा और टूलकिट निर्माता (Hammer & Tool Maker) निर्माण कार्यों और दस्तकारी के लिए हथौड़े व हस्त-उपकरण निर्माता
6 ताला बनाने वाले (Locksmith) ताले, कुंजियां और सुरक्षा उपकरण बनाने व मरम्मत करने वाले कारीगर
7 मूर्तिकार व पत्थर तराशने वाले (Sculptor / Stone Carver) पत्थर की कलात्मक मूर्तियां, नक्काशीदार स्तंभ और कलाकृतियां गढ़ने वाले
8 सुनार (Goldsmith) सोने, चांदी और कीमती धातुओं के पारंपरिक आभूषण व बर्तन निर्माता
9 कुम्हार (Potter) मिट्टी के बर्तन, दीये, मटके, कुल्हड़ और टेराकोटा कलाकृतियां निर्माता
10 मोची / चर्मकार (Cobbler / Footwear Artisan) चमड़े के पारंपरिक जूते, चप्पल और चमड़े की वस्तुएं बनाने व मरम्मत करने वाले
11 राजमिस्त्री (Mason) ईंट, पत्थर, गारे और सीमेंट से आवास व पारंपरिक भवनों का निर्माण करने वाले
12 टोकरी / चटाई / झाड़ू निर्माता (Basket / Mat / Broom Maker) बांस, सरकंडा, नारियल रेशे (Coir) और घास से घरेलू उत्पाद बनाने वाले
13 गुड़िया और खिलौना निर्माता (Traditional Toy Maker) लकड़ी, कपड़े, मिट्टी और प्राकृतिक रेशों से पारंपरिक हस्तनिर्मित खिलौने बनाने वाले
14 नाई (Barber) पारंपरिक बाल काटने, दाढ़ी संवारने और व्यक्तिगत सौंदर्य सेवा देने वाले
15 मालाकार (Garland Maker) प्राकृतिक फूलों की मालाएं, सेहरे और सजावटी पुष्प उत्पाद तैयार करने वाले
16 धोबी (Washerman) पारंपरिक कपड़े धोने, सुखाने और इस्त्री करने का कार्य करने वाले कामगार
17 दर्जी (Tailor) सिलाई मशीन व हाथ से वस्त्र सिलने और परिधान तैयार करने वाले दर्जी
18 मछली का जाल बुनने वाले (Fishing Net Maker) मछुआरों के लिए नायलॉन व सूती धागों से मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले

लोन/ऋण संबंधी लाभ (Verified Credit Support Details)

कारीगरों को वित्तीय साहूकारों और अत्यधिक ब्याज दरों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए केंद्र सरकार ने बैंकों के साथ मिलकर विशेष ऋण व्यवस्था तैयार की है:

  • प्रथम चरण (First Tranche): बुनियादी प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद लाभार्थी को ₹1,00,000 तक का प्रारंभिक ऋण दिया जाता है। इस ऋण की चुकौती अवधि 18 माह निर्धारित है।
  • द्वितीय चरण (Second Tranche): प्रथम चरण के ऋण की नियमित और समय पर अदायगी करने पर, तथा खाते के कम से कम 6 माह सक्रिय रहने के बाद, कारीगर ₹2,00,000 तक के दूसरे ऋण के पात्र हो जाते हैं। इसकी चुकौती अवधि 30 माह है।
  • रियायती ब्याज दर (5% Interest Rate): लाभार्थी से केवल 5% वार्षिक रियायती ब्याज लिया जाता है। शेष 8% ब्याज राशि केंद्र सरकार ब्याज अनुदान (Interest Subvention) के रूप में सीधे बैंकों को अदा करती है।
  • शून्य बंधक / शून्य गारंटी (Zero Collateral): इस ऋण के लिए किसी जमीन, मकान या संपत्ति को गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं है। इस ऋण की पूर्ण गारंटी ‘क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज’ (CGTMSE) द्वारा दी जाती है।

टूलकिट प्रोत्साहन अनुदान (Toolkit Incentive Details)

पुराने और घिसे हुए औजारों से कार्य करने पर कारीगरों का समय अधिक लगता है और उत्पादकता घटती है। इस समस्या के समाधान हेतु सरकार ने टूलकिट प्रोत्साहन का विशेष प्रावधान किया है:

कौशल प्रशिक्षण के प्रारंभिक मूल्यांकन के उपरांत लाभार्थी के मोबाइल नंबर पर ₹15,000 का डिजिटल ई-रूपी (e-RUPI) वाउचर जारी किया जाता है। इस वाउचर को सरकार द्वारा अधिकृत पंजीकृत हार्डवेयर व टूल विक्रेताओं के पास आधुनिक, आईएसआई-मानक युक्त औजार खरीदकर भुनाया जा सकता है। यह राशि नकद नहीं दी जाती ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि धनराशि का उपयोग केवल गुणवत्तापूर्ण औजार खरीदने में ही हो।

प्रशिक्षण संबंधी लाभ (Skill Training Details)

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के तत्वावधान में कारीगरों को आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है:

  • बुनियादी प्रशिक्षण (Basic Skill Training): 5 से 7 दिनों का होता है, जिसमें कम से कम 40 घंटे का व्यावहारिक व सैद्धांतिक अभ्यास कराया जाता है। इसमें नए औजारों का संचालन, डिजाइनिंग और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद निर्माण सिखाया जाता है।
  • उन्नत प्रशिक्षण (Advanced Training): बुनियादी कोर्स के बाद जो कारीगर अपने हुनर को और अधिक निखारना चाहते हैं, उनके लिए 15 दिन या उससे अधिक (न्यूनतम 120 घंटे) का उन्नत प्रशिक्षण उपलब्ध है।
  • ₹500 दैनिक स्टाइपेंड: प्रशिक्षण के दौरान कारीगरों का दैनिक रोजगार प्रभावित न हो, इसके लिए प्रतिदिन ₹500 का स्टाइपेंड सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खाते में भेजा जाता है।

प्रमाणपत्र व आईडी कार्ड (PM Vishwakarma Certificate & ID Card)

सफलतापूर्वक सत्यापन और पंजीकरण पूर्ण होने के बाद कारीगरों को आधिकारिक पीएम विश्वकर्मा डिजिटल प्रमाण पत्र और एक स्मार्ट पहचान पत्र (ID Card) जारी किया जाता है। इस कार्ड पर एक विशिष्ट विश्वकर्मा पहचान संख्या (Unique ID) और सत्यापन क्यूआर कोड अंकित होता है। इस पहचान पत्र के माध्यम से कारीगर देश के किसी भी कोने में बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और व्यापार मेलों में भाग लेने के लिए अपनी आधिकारिक पहचान सिद्ध कर सकते हैं।

आवेदन कैसे करें — Step by Step (Registration Procedure)

पीएम विश्वकर्मा योजना में पंजीकरण की आधिकारिक प्रक्रिया अत्यंत सरल और पारदर्शी है। नागरिक नजदीकी सीएससी केंद्र के माध्यम से निम्नलिखित चरणों में आवेदन पूरा कर सकते हैं:

  1. सीएससी केंद्र पर जाएं: आवेदक अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC VLE) पर अपने सभी मूल दस्तावेजों के साथ स्वयं उपस्थित हों।
  2. बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण: सीएससी संचालक द्वारा पोर्टल pmvishwakarma.gov.in पर आवेदक का आधार नंबर दर्ज कर फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन द्वारा बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन किया जाएगा।
  3. ट्रेड और व्यक्तिगत विवरण दर्ज करें: 18 पारंपरिक शिल्पों की सूची में से अपना व्यवसाय चुनें, परिवार के सदस्यों का विवरण भरें तथा आधार से जुड़े बैंक खाते की जानकारी दर्ज करें।
  4. दस्तावेज सत्यापन और रसीद: सभी आवश्यक प्रविष्टियों की जांच करने के बाद आवेदन सबमिट करें और पोर्टल द्वारा जनरेट की गई पावती रसीद (Acknowledgement Slip) व आवेदन संख्या सुरक्षित रख लें।

जरूरी दस्तावेज (Mandatory Documents Checklist)

पंजीकरण हेतु निम्नलिखित वैध दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  • आधार कार्ड (Aadhaar Card): मोबाइल नंबर से लिंक आधार कार्ड अनिवार्य है।
  • सक्रिय मोबाइल नंबर: ओटीपी सत्यापन और ई-वाउचर प्राप्त करने हेतु।
  • बैंक खाता पासबुक: आधार सीडेड और डीबीटी (DBT) सक्रिय बैंक खाता।
  • राशन कार्ड: पारिवारिक सदस्यों के सत्यापन हेतु (यदि उपलब्ध हो)।
  • व्यवसाय से जुड़ा स्व-घोषणा पत्र: संबंधित ट्रेड में कार्यरत होने का स्व-प्रमाणन।

आवेदन के बाद क्या होता है? (सत्यापन की 3-स्तरीय व्यवस्था)

आवेदन जमा होने के बाद अपात्र व्यक्तियों को रोकने और वास्तविक कारीगरों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 3-स्तरीय पारदर्शी सत्यापन प्रणाली लागू की है:

  • प्रथम स्तर (ग्राम पंचायत / यूएलबी): ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित ग्राम प्रधान अथवा पंचायत सचिव द्वारा और शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय (ULB Executive Officer) द्वारा जमीनी स्तर पर कारीगर के कार्य की पुष्टि की जाती है।
  • द्वितीय स्तर (जिला कार्यान्वयन समिति): जिला स्तर पर जिला मजिस्ट्रेट (DM/Collector) की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा प्रथम स्तर के अनुमोदित आवेदनों की जांच और स्क्रीनिंग की जाती है।
  • तृतीय स्तर (राज्य/राष्ट्रीय स्क्रीनिंग समिति): अंतिम स्तर की स्वीकृति के बाद लाभार्थी का नाम आधिकारिक पोर्टल पर सक्रिय हो जाता है और डिजिटल प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है।

आवेदन/लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया व समयसीमा

सत्यापन पूर्ण होने के उपरांत जिला स्तर पर प्रशिक्षण बैच तैयार किए जाते हैं। आवेदक को एसएमएस द्वारा प्रशिक्षण केंद्र और तिथि की सूचना दी जाती है। 5 दिवसीय बुनियादी प्रशिक्षण पूर्ण होते ही ₹15,000 का टूलकिट ई-वाउचर मोबाइल पर आ जाता है, और उसके तुरंत बाद बैंक द्वारा ₹1 लाख के प्रथम ऋण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।

महत्वपूर्ण बातें और सावधानियां (Precautions for Artisans)

सरकारी सहायता का निर्बाध लाभ उठाने के लिए कारीगरों को इन महत्वपूर्ण बिंदुओं का ध्यान रखना चाहिए:

  • आवेदन पूरी तरह निःशुल्क है: पीएम विश्वकर्मा पोर्टल पर पंजीकरण का कोई सरकारी शुल्क नहीं है। सीएससी को सरकार द्वारा सीधे भुगतान किया जाता है, अतः किसी भी व्यक्ति या बिचौलिए को अतिरिक्त पैसे न दें।
  • बैंक खाते में डीबीटी सक्रिय रखें: सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता एनपीसीआई (NPCI) मैपर से लिंक है ताकि स्टाइपेंड और सब्सिडी की राशि सीधे आपके खाते में बिना रुकावट पहुंच सके।
  • ऋण की समय पर अदायगी: पहले ₹1 लाख के ऋण की किस्तों को समय पर चुकाएं ताकि आप बिना किसी परेशानी के ₹2 लाख के दूसरे ऋण के पात्र बन सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल — FAQs

प्रश्न 1: क्या इस योजना के तहत मिलने वाली ₹15,000 की टूलकिट राशि वापस लौटानी होती है?
उत्तर: नहीं, ₹15,000 का टूलकिट ई-वाउचर सरकार की ओर से एकमुश्त वित्तीय अनुदान (Grant) है, इसे कभी भी वापस नहीं लौटाना होता है।

प्रश्न 2: 5% ब्याज दर वाले ऋण के लिए क्या किसी गारंटर या जमानत की जरूरत है?
उत्तर: नहीं, पीएम विश्वकर्मा ऋण पूरी तरह संपार्श्विक-मुक्त (Collateral-Free) है। इसकी संपूर्ण गारंटी क्रेडिट गारंटी फंड (CGTMSE) द्वारा दी जाती है।

प्रश्न 3: क्या एक ही परिवार के दो सदस्य अलग-अलग आवेदन कर सकते हैं?
उत्तर: नहीं, योजना के आधिकारिक नियमों के अनुसार एक परिवार (पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे) से केवल एक ही सदस्य आवेदन करने के लिए पात्र है।

प्रश्न 4: प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाला ₹500 का स्टाइपेंड कब मिलता है?
उत्तर: प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न होने और उपस्थिति दर्ज होने के बाद स्टाइपेंड की कुल राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे आपके बैंक खाते में भेजी जाती है।

प्रश्न 5: यदि किसी कारीगर के पास राशन कार्ड न हो तो क्या वह आवेदन कर सकता है?
उत्तर: हाँ, राशन कार्ड अनिवार्य नहीं है। राशन कार्ड न होने की स्थिति में आवेदक अपने परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड प्रस्तुत करके पारिवारिक घोषणा पत्र जमा कर सकते हैं।

आधिकारिक स्रोत व हेल्पलाइन (Official Source & Contact)

पीएम विश्वकर्मा योजना के आधिकारिक दिशानिर्देशों और ताजा अपडेट की पुष्टि भारत सरकार के अधिकृत पोर्टलों से की जा सकती है:

  • आधिकारिक राष्ट्रीय पोर्टल: pmvishwakarma.gov.in
  • नोडल मंत्रालय: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of MSME) — msme.gov.in
  • राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन: 18002677777 / 17923