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गोबर से गैस तक: नई गोबरधन योजना में किसके लिए क्या अवसर है?

प्रकाशन: 10 अक्टूबर, 2026 • अद्यतित: 15 अक्टूबर, 2026 • लेखक: योजनाए संपादकीय टीम
गोबर से गैस तक: नई गोबरधन योजना में किसके लिए क्या अवसर है?

गोबरधन योजना 2026 एक नई केंद्रीय क्षेत्र योजना है। इसका मकसद गोबर, फसल अवशेष और दूसरे जैविक कचरे से साफ ईंधन बनाने के काम को बढ़ावा देना है। योजना का कुल परिव्यय ₹23,731 करोड़ है और यह वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक, यानी दस साल चलेगी। इससे किसानों, गौशालाओं, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी संस्थाओं और गांव के उद्यमियों के लिए नए मौके बन सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे: यह हर किसान के खाते में सीधे पैसा भेजने वाली योजना नहीं है। इसका मुख्य जोर कंप्रेस्ड बायोगैस यानी सीबीजी बनाने वाले प्लांटों और उनसे जुड़े ढांचे पर है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 1 अक्टूबर 2026 को इस योजना की औपचारिक शुरुआत की (पीआईबी)। लक्ष्य है कि देश में सीबीजी उत्पादन लगभग दस गुना बढ़कर करीब 5 एमएमएससीएमडी (मिलियन मानक घन मीटर प्रतिदिन) तक पहुंचे।

गोबरधन योजना 2026 क्या है?

नई गोबरधन योजना पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र योजना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे 6 अगस्त 2026 को मंजूरी दी थी। पहले सीबीजी से जुड़ा काम चार अलग-अलग मंत्रालयों में बंटा हुआ था। अब पूरी योजना के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ही अकेला नोडल मंत्रालय है। योजना का उद्देश्य गोबर, फसल अवशेष और उपयुक्त जैविक कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन बढ़ाना है।

सीबीजी को आम बोलचाल में बायो-सीएनजी भी कहते हैं। गोबर जैसे जैविक पदार्थों से पहले बायोगैस बनती है। फिर उसे साफ करके दबाव में भरा जाता है, ताकि उसे ईंधन की तरह इस्तेमाल किया जा सके।

पुरानी गोबरधन योजना और नई योजना में क्या फर्क है?

गोबरधन की शुरुआत 2018 में जल शक्ति मंत्रालय के स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत हुई थी। तब यह ठोस और तरल कचरा प्रबंधन का एक हिस्सा था। इसका मकसद गांवों में गोबर, रसोई का बचा खाना, फसल अवशेष और बाजार के कचरे को बायोगैस और जैविक स्लरी में बदलना और गांवों को साफ रखना था।

2026 की नई योजना का दायरा अलग है। इसका मुख्य फोकस सीबीजी उत्पादन के पूरे तंत्र को बढ़ाना है। इसमें प्लांट लगाने के लिए पूंजी सहायता, गैस की तय कीमत, खरीद की व्यवस्था, पाइपलाइन तक पहुंच और लोन गारंटी शामिल हैं। इसलिए सिर्फ गोबरधन नाम देखकर यह न मानें कि दोनों योजनाओं में लाभ, पात्रता और आवेदन का तरीका एक जैसा होगा।

पीआईबी की पृष्ठभूमि जानकारी के अनुसार, नई योजना पहले से चल रही कई पहलों की नींव पर बनी है। इनमें सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन यानी SATAT, जैविक खाद के लिए बाजार विकास सहायता (MDA), बायोमास एकत्रीकरण मशीनरी (BAM) योजना और पाइपलाइन ढांचा विकास (DPI) योजना शामिल हैं। नई योजना में मंत्रालय से लाभ लेने के लिए प्लांट का एकीकृत पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नंबर होना जरूरी है।

योजना के छह मुख्य घटक आसान भाषा में

योजना के छह मुख्य घटक यानी हिस्से हैं। हर घटक का काम अलग है, और हर किसान को हर तरह की मदद नहीं मिलेगी।

घटक आसान भाषा में मतलब
सीबीजी खरीद का भरोसा शहरों में गैस सप्लाई करने वाली (सिटी गैस वितरण) कंपनियों के लिए सीबीजी खरीद का एक तय हिस्सा रखा गया है।
तय प्रशासनिक कीमत सीबीजी के लिए ₹2,110 प्रति एमएमबीटीयू की प्रशासनिक कीमत तय की गई है।
पूंजी सहायता पात्र नए प्लांटों को स्थापित क्षमता के हर टन प्रतिदिन पर अधिकतम ₹2 करोड़ तक सहायता।
पाइपलाइन सहायता प्लांटों के क्लस्टर को मुख्य पाइपलाइन से जोड़ने पर पात्र पूंजी खर्च का 80% तक और अकेले प्लांट को शहर गैस नेटवर्क से जोड़ने पर 50% तक सहायता।
लोन गारंटी पात्र एमएसएमई सीबीजी परियोजनाओं के बैंक लोन पर 85% तक गारंटी।
सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड तकनीक, क्षमता निर्माण, कच्चे माल के आकलन और उसे इकट्ठा करने, जिला स्तर की योजना और जैविक खाद के मूल्य संवर्धन के लिए सहायता।

गैस खरीद की इस बाध्यता के तहत शहर गैस वितरण कंपनियों के लिए सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) श्रेणी में सीबीजी का हिस्सा तय किया गया है। यह हिस्सा वित्त वर्ष 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत है। इसका मतलब यह नहीं कि किसी खास प्लांट को अपने आप खरीद का अनुबंध मिल जाएगा।

गोबर और पराली से कमाई: किसानों और गौशालाओं के लिए मौके

किसानों और गौशालाओं के लिए सबसे व्यावहारिक मौका प्लांट को कच्चा माल देने में है। पीआईबी के अनुसार किसान, सहकारी संस्थाएं, गौशालाएं और स्थानीय उद्यम कच्चा माल जुटाने, उसे एक जगह इकट्ठा करने, ढुलाई और प्रोसेसिंग में भागीदार बन सकते हैं। अगर आपके आसपास कोई प्लांट है, तो किसान, गौशाला, डेयरी, किसान उत्पादक संगठन या सहकारी संस्था प्लांट संचालक से बात करके सप्लाई की शर्तें जान सकते हैं।

लेकिन कमाई की कोई एक तय रकम सभी किसानों पर लागू नहीं होती। गोबर या पराली का दाम जगह, मात्रा, नमी, गुणवत्ता, ढुलाई खर्च और प्लांट की जरूरत पर निर्भर करता है। इसलिए पहले पता करें कि प्लांट कौन-सा कच्चा माल लेता है, कितनी मात्रा चाहिए, भुगतान कैसे होगा और खेत या गौशाला से प्लांट तक माल पहुंचाने का खर्च कौन उठाएगा।

प्लांट से निकलने वाली जैविक खाद या पची हुई स्लरी भी काम की हो सकती है। हालांकि इसकी गुणवत्ता, इस्तेमाल और बिक्री की व्यवस्था हर परियोजना में अलग हो सकती है। जैविक खेती में रुचि रखने वाले किसान पीकेवीवाई योजना और जैविक खेती के बारे में भी पढ़ सकते हैं। लेकिन वह एक अलग योजना है; उसे गोबरधन योजना की सहायता न समझें।

प्लांट लगाने वालों के लिए पूंजी सहायता, कीमत और लोन गारंटी

नई योजना का सीधा आर्थिक लाभ मुख्य रूप से पात्र सीबीजी परियोजनाओं और उनसे जुड़े उद्यमों के लिए है। कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट सब्सिडी की बात करें, तो पात्र नई (ग्रीनफील्ड) परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के हिसाब से अधिकतम ₹2 करोड़ प्रति टन प्रतिदिन तक पूंजी सहायता मिल सकती है। इसमें प्लांट की मशीनों के साथ कच्चा माल इकट्ठा करने और जैविक खाद की प्रोसेसिंग से जुड़े उपकरण भी शामिल हैं। यह अधिकतम सीमा है, हर प्लांट को मिलने वाली तय रकम नहीं। पीआईबी की पृष्ठभूमि जानकारी के अनुसार, अपनी क्षमता बढ़ाने वाली मौजूदा (ब्राउनफील्ड) परियोजनाएं भी पात्र होंगी।

योजना में सीबीजी की प्रशासनिक कीमत ₹2,110 प्रति एमएमबीटीयू (गैस की ऊर्जा नापने की इकाई) तय की गई है। पीआईबी की पृष्ठभूमि जानकारी के अनुसार यह लगभग ₹105 प्रति किलोग्राम के बराबर है। इसे हर हाल में मिलने वाली अंतिम बिक्री कीमत न मानें। प्लांट संचालक को लागू नियम, गुणवत्ता, अनुबंध और खरीद व्यवस्था की पुष्टि करनी चाहिए।

लोन के मामले में, पात्र एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सीबीजी परियोजनाओं के लिए अलग बायो-सीएनजी प्लांट लोन गारंटी व्यवस्था बनाई गई है। लोन न चुका पाने (डिफॉल्ट) की स्थिति में यह बकाया राशि के 85 प्रतिशत तक को कवर करेगी। गारंटी की सीमा सामान्य एमएसएमई परियोजनाओं के लिए ₹20 करोड़ प्रति परियोजना और महिलाओं के नेतृत्व वाली एमएसएमई परियोजनाओं के लिए ₹25 करोड़ प्रति परियोजना है। गारंटी का मतलब यह नहीं कि सरकार लोन देगी या उद्यमी को लोन नहीं चुकाना होगा। लोन बैंक या वित्तीय संस्था की शर्तों पर ही लेना और चुकाना होगा।

राज्य सरकारों की भूमिका और जिले में मौके

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, योजना को जमीन पर उतारने में राज्य सरकारों की अहम भूमिका होगी। इसमें राज्य स्तर की सीबीजी नीति, कच्चे माल का आकलन, उपयुक्त जमीन, जल्दी मंजूरी और बुनियादी ढांचा शामिल हैं। चैलेंज फंड से जिला स्तर पर सीबीजी विकास की योजना बनाने में भी मदद दी जाएगी। अपने जिले के मौके जानने के लिए राज्य के संबंधित विभाग या जिला प्रशासन से जानकारी लें।

गोबरधन पोर्टल रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

सीबीजी या बायो-सीएनजी प्लांट चलाने वाला, या प्लांट लगाने की योजना बना रहा कोई भी व्यक्ति या संस्था गोबरधन यूनिफाइड रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नंबर ले सकती है। मंत्रालय से लाभ और सहायता लेने के लिए यह नंबर जरूरी है। पीआईबी के अनुसार 6 अगस्त 2026 तक पोर्टल पर 1,908 प्लांट रजिस्टर्ड थे। इनमें से 217 चालू हो चुके थे और 339 निर्माणाधीन थे। नीचे दिए गए कदम सिर्फ सामान्य मार्गदर्शन हैं; अंतिम निर्देश पोर्टल पर ही देखें।

  1. आधिकारिक पोर्टल खोलें और देखें कि रजिस्ट्रेशन का कौन-सा विकल्प आपके प्लांट या परियोजना पर लागू होता है।
  2. उद्यम और परियोजना की पहचान, संपर्क जानकारी, प्लांट की जगह, क्षमता और कच्चे माल से जुड़े दस्तावेज तैयार रखें। पोर्टल पर मांगे गए दस्तावेजों की सूची को ही अंतिम मानें।
  3. फॉर्म जमा करने से पहले हर जानकारी को दस्तावेजों से मिला लें। रजिस्ट्रेशन नंबर या पावती संभालकर रखें।
  4. पूंजी सहायता, लोन गारंटी या पाइपलाइन सहायता के लिए अलग आवेदन या अतिरिक्त कागजात चाहिए या नहीं, यह आधिकारिक निर्देशों से पता करें।

न्यूनतम प्लांट क्षमता जैसी पात्रता शर्तें, जरूरी दस्तावेज और समय-सीमा पोर्टल या संबंधित सरकारी दफ्तर से जरूर जांचें। किसी दूसरे स्रोत पर बताई गई सीमा के भरोसे निवेश न करें। रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसे मांगने वाले बिचौलियों से सावधान रहें।

सावधानियां और आम गलतफहमियां

सबसे जरूरी बात: गोबरधन योजना 2026 को किसानों के लिए सीधी नकद सहायता वाली योजना न समझें। किसान या गौशाला को फायदा आम तौर पर कच्चा माल बेचने या स्थानीय परियोजना से जुड़ने से मिल सकता है; यह अपने आप मिलने वाला भुगतान नहीं है।

चीनीमंडी की 7 अक्टूबर 2026 की एक खबर के अनुसार, जिन परियोजनाओं का 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा कच्चा माल नगर ठोस कचरे (शहरी कूड़े) या सीवेज से आता है, उन्हें पूंजी सहायता और लोन गारंटी से बाहर रखा गया है। पीआईबी की लॉन्च विज्ञप्ति में यह शर्त नहीं बताई गई है। इसलिए इसे अंतिम नियम मानने से पहले मंत्रालय या पोर्टल से पुष्टि करें। अगर आपकी परियोजना का कच्चा माल इसी श्रेणी में आता है, तो सिर्फ खबर के आधार पर निवेश का फैसला न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या गोबरधन योजना 2026 में किसान को सीधे पैसा मिलेगा?

नहीं, यह हर किसान के खाते में सीधे नकद सहायता देने वाली योजना नहीं है। किसान प्लांट को गोबर या दूसरा स्वीकार्य कच्चा माल बेचकर कमाई की संभावना देख सकते हैं।

क्या महिला उद्यमियों के लिए अलग सुविधा है?

महिलाओं के नेतृत्व वाली पात्र एमएसएमई परियोजनाओं के लिए लोन गारंटी की अधिकतम सीमा ₹25 करोड़ प्रति परियोजना है। सामान्य एमएसएमई परियोजनाओं के लिए यह सीमा ₹20 करोड़ है। यह गारंटी है, नकद अनुदान या लोन माफी नहीं।

गोबरधन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कौन करे?

प्लांट चलाने वाले या लगाने की योजना बना रहे लोग और संस्थाएं। गोबर बेचने वाले किसान यह न मान लें कि उनके लिए यह रजिस्ट्रेशन अपने आप जरूरी है; वे स्थानीय प्लांट से सप्लाई की शर्तें पूछें।

क्या पराली से भी कमाई हो सकती है?

फसल अवशेष यानी पराली कुछ प्लांटों के लिए कच्चा माल हो सकती है, लेकिन हर प्लांट हर तरह की पराली नहीं लेता। स्थानीय प्लांट से उसकी जरूरत, गुणवत्ता, मात्रा, दर और ढुलाई की शर्तें पूछें। किसी तय कमाई की गारंटी नहीं है।

निष्कर्ष

गोबरधन योजना 2026 का उद्देश्य गोबर और उपयुक्त जैविक अवशेषों को साफ ईंधन में बदलने वाले कारोबार को बढ़ावा देना है। किसानों और गौशालाओं के लिए मौके स्थानीय सीबीजी प्लांटों को नियमित कच्चा माल देने और जैविक खाद के इस्तेमाल से जुड़े हैं। पात्र उद्यमियों के लिए पूंजी सहायता, पाइपलाइन सहायता और लोन गारंटी अहम हो सकती हैं। लेकिन गोबरधन योजना 2026 को सीधा नकद लाभ मानकर न चलें। पहले आधिकारिक पोर्टल पर जानकारी जांचें, स्थानीय मांग और खर्च समझें, और सभी शर्तों की पुष्टि के बाद ही कोई आर्थिक फैसला लें।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है; इसे कानूनी, वित्तीय या निवेश संबंधी सलाह न मानें। योजना के नियम, पात्रता, सहायता राशि और तिथियां समय-समय पर बदल सकती हैं। आवेदन या निवेश से पहले आधिकारिक पोर्टल या संबंधित सरकारी कार्यालय से ताजा जानकारी जरूर जांचें।