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पीएम किसान 24वीं किस्त 2026: तारीख अभी घोषित नहीं, पर ये 3 शर्तें अधूरी रहीं तो अटक सकते हैं ₹2,000

प्रकाशन: 6 अक्टूबर, 2026 • अद्यतित: 15 अक्टूबर, 2026 • लेखक: योजनाए संपादकीय टीम
पीएम किसान 24वीं किस्त 2026: तारीख अभी घोषित नहीं, पर ये 3 शर्तें अधूरी रहीं तो अटक सकते हैं ₹2,000

20 जून 2026 को देश के 9.44 करोड़ से ज्यादा किसानों के लिए ₹18,880 करोड़ से अधिक की 23वीं किस्त जारी की गई थी। उसके बाद से हर गांव, हर किसान ग्रुप और हर यूट्यूब चैनल पर एक ही सवाल है — पीएम किसान की 24वीं किस्त कब आएगी? सोशल मीडिया पर 20 अक्टूबर की तारीख तेजी से घूम रही है, लेकिन 6 अक्टूबर 2026 तक कृषि मंत्रालय या पीआईबी ने 24वीं किस्त की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। तो असली सवाल तारीख का नहीं, बल्कि यह है — जब किस्त जारी होगी, तब क्या आपका नाम उस सूची में होगा?

इस लेख में हम पीएम किसान 24वीं किस्त को लेकर सरकारी दस्तावेजों के आधार पर समझेंगे कि अब तक क्या पक्का है, क्या सिर्फ अंदाजा है, और किन वजहों से हर बार लाखों किसानों की किस्त अटक जाती है। नियम और तारीखें बदल सकती हैं, इसलिए कोई भी कदम उठाने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर ताजा जानकारी जरूर जांचें।

23वीं किस्त में क्या हुआ था

पीआईबी की 20 जून 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी की। इस किस्त में:

  • 9.44 करोड़ से ज्यादा किसानों को ₹18,880 करोड़ से अधिक की राशि मिली।
  • इनमें 2.18 करोड़ से ज्यादा महिला किसान थीं।
  • योजना की शुरुआत से अब तक 23 किस्तों में ₹4.46 लाख करोड़ से ज्यादा किसान परिवारों तक पहुंच चुके हैं।
  • केंद्रीय बजट 2026-27 में पीएम-किसान के लिए ₹60,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

बाद में लोकसभा में 21 जुलाई 2026 को दिए गए एक लिखित उत्तर में सरकार ने 16 जुलाई 2026 तक के आंकड़े दिए — 23वीं किस्त में कुल ₹18,895.10 करोड़ की राशि 9,44,34,650 लाभार्थियों को भेजी गई। सबसे ज्यादा लाभार्थी इन राज्यों में रहे:

राज्य लाभार्थी (23वीं किस्त) राशि (₹ करोड़)
उत्तर प्रदेश 2,17,63,781 4,353.25
महाराष्ट्र 90,55,669 1,811.67
मध्य प्रदेश 81,65,837 1,634.61
बिहार 73,04,821 1,460.96
राजस्थान 65,99,142 1,319.84

यानी 23वीं किस्त के लगभग हर चार-पांच लाभार्थियों में से एक उत्तर प्रदेश से था। ऊपर के पांचों राज्य हिंदी पट्टी या उसके पड़ोसी हैं — इसी वजह से हिंदी बोलने वाले किसानों में 24वीं किस्त को लेकर सबसे ज्यादा बेचैनी है।

24वीं किस्त की तारीख: क्या पक्का है और क्या अफवाह

सबसे पहले साफ बात: 24वीं किस्त की आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। 20 अक्टूबर वाली तारीख इस अंदाजे पर टिकी है कि पिछली किस्त 20 जून को आई थी और किस्तें लगभग चार महीने के अंतर पर आती हैं। हालांकि असल में किस्तों के बीच का अंतर हर बार एक जैसा नहीं रहा — 22वीं किस्त 13 मार्च 2026 को और 23वीं 20 जून 2026 को आई थी।

योजना के आधिकारिक प्रश्नोत्तर (FAQ) के अनुसार, हर पात्र किसान परिवार को सालाना ₹6,000 मिलते हैं, जो हर चार महीने में ₹2,000 की तीन बराबर किस्तों में दिए जाते हैं। पोर्टल पर किस्तें तीन अवधियों के हिसाब से गिनी जाती हैं — अप्रैल–जुलाई, अगस्त–नवंबर और दिसंबर–मार्च। 23वीं किस्त अप्रैल–जुलाई 2026-27 अवधि की थी, इसलिए अब तक के क्रम (पैटर्न) के आधार पर अनुमान है कि अगली किस्त अगस्त–नवंबर 2026-27 अवधि की गिनी जाएगी — यह सरकार का घोषित कार्यक्रम नहीं है। लेकिन अवधि का मतलब तय तारीख नहीं होता — असली दिन सरकार की घोषणा से ही तय होगा।

इसलिए किसी भी वॉट्सऐप मैसेज, वायरल पोस्ट या “आज रात पैसे आएंगे” जैसे दावे पर भरोसा न करें। तारीख की पुष्टि सिर्फ पीएम-किसान पोर्टल या पीआईबी से करें। एक और सावधानी — अगर कोई फोन या मैसेज “किस्त चालू करवाने” के नाम पर ओटीपी या पैसे मांगे, तो वह धोखा हो सकता है।

किस्त क्यों अटकती है: तीन अनिवार्य शर्तें

लोकसभा के उसी उत्तर में कृषि मंत्रालय ने साफ लिखा है कि पीएम-किसान में भूमि सीडिंग, ई-केवाईसी और आधार को बैंक खाते से जोड़ना — ये तीनों पात्रता और लाभ पाने की अनिवार्य शर्तें हैं। पीआईबी की जून 2026 की विज्ञप्ति भी यही बात दोहराती है। अगर इनमें से एक भी अधूरी है, तो किस्त रुक सकती है।

1. भूमि सीडिंग (Land Seeding): आपकी जमीन का रिकॉर्ड पीएम-किसान पोर्टल पर आपके नाम से जुड़ा होना चाहिए। यह काम राज्य सरकार के राजस्व/कृषि विभाग के स्तर पर होता है। अगर स्टेटस में भूमि सीडिंग अधूरी दिख रही है, तो अपने हल्का पटवारी, लेखपाल या प्रखंड कृषि कार्यालय से संपर्क करें।

2. ई-केवाईसी: पीआईबी के अनुसार ई-केवाईसी तीन तरीकों से हो सकती है —

  • आधार से जुड़े मोबाइल पर ओटीपी के जरिए
  • कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर बायोमेट्रिक (अंगूठा) के जरिए
  • पीएम-किसान मोबाइल ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन यानी चेहरा स्कैन करके

सरकार के मुताबिक 5 लाख से ज्यादा कॉमन सर्विस सेंटर पंजीकरण और ई-केवाईसी के लिए जोड़े गए हैं। 2023 में ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन जोड़ा गया, ताकि जिनके फिंगरप्रिंट नहीं आते या मोबाइल आधार से नहीं जुड़ा, उन्हें भी सुविधा मिले।

3. आधार-बैंक लिंकिंग: किस्त डीबीटी के जरिए सीधे आधार से जुड़े बैंक खाते में जाती है। अपने बैंक से पूछें कि आपका आधार किस खाते से जुड़ा है और वह खाता चालू है या नहीं।

कौन पात्र है और कौन नहीं

योजना के आधिकारिक FAQ के अनुसार, “किसान परिवार” का मतलब है — पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे, जिनके नाम पर राज्य के भूमि रिकॉर्ड में खेती योग्य जमीन दर्ज हो। कुछ अहम बातें:

  • जमीन अपने नाम पर होनी चाहिए। पिता या दादा के नाम की जमीन पर खेती करने वाले को लाभ नहीं मिलता, जब तक विरासत से जमीन उनके नाम न हो जाए।
  • बटाईदार या किराये पर खेती करने वाले किसान इस योजना में पात्र नहीं हैं, क्योंकि भूमि स्वामित्व ही आधार है।
  • पात्रता तय करने की कट-ऑफ तारीख 1 फरवरी 2019 रखी गई है; उसके बाद केवल जमीन मालिक की मृत्यु पर उत्तराधिकार से हुए हस्तांतरण को मान्यता दी गई है।
  • खेती की जमीन का गैर-कृषि इस्तेमाल हो रहा हो तो वह योजना में शामिल नहीं होती।

ये योजना से बाहर हैं (एक्सक्लूजन) — सभी संस्थागत भू-धारक, और ऐसे किसान परिवार जिनका कोई एक सदस्य भी नीचे दी गई किसी श्रेणी में आता हो:

  • संवैधानिक पदों पर रहे या मौजूदा लोग; मौजूदा या पूर्व मंत्री, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, नगर निगम के मेयर और जिला पंचायत अध्यक्ष
  • केंद्र/राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों और स्वायत्त संस्थाओं के मौजूदा या सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी (मल्टी-टास्किंग स्टाफ, चतुर्थ श्रेणी/ग्रुप-डी को छोड़कर)
  • ₹10,000 या उससे ज्यादा मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त लोग (एमटीएस/चतुर्थ श्रेणी/ग्रुप-डी को छोड़कर)
  • पिछले असेसमेंट वर्ष में आयकर भरने वाले लोग
  • पेशेवर संस्थाओं में पंजीकृत और प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट और आर्किटेक्ट

यह सूची हल्के में लेने वाली नहीं है। पीआईबी के अनुसार दिसंबर 2025 तक अपात्र लाभार्थियों से ₹416.75 करोड़ की वसूली की जा चुकी है। FAQ में साफ लिखा है कि गलत घोषणा करने पर मिली रकम वापस ली जा सकती है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

अपना स्टेटस ऐसे जांचें

योजना के आधिकारिक FAQ के अनुसार पीएम-किसान पोर्टल पर एक अलग “किसान कॉर्नर” (Farmers Corner) बनाया गया है, जहां नया पंजीकरण, आधार के अनुसार नाम सुधार और लाभार्थी स्टेटस देखने के विकल्प दिए गए हैं। मोटे तौर पर तरीका यह है:

  1. pmkisan.gov.in खोलें और किसान कॉर्नर में स्टेटस वाला विकल्प चुनें।
  2. “Know Your Status” पेज पर अपना 11 अंकों का रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा कोड दर्ज करें। रजिस्ट्रेशन नंबर याद न हो, तो उसी पेज पर “Know Your Registration No.” विकल्प से पंजीकृत मोबाइल नंबर या आधार नंबर के जरिए उसे पता करें।
  3. मोबाइल पर आया ओटीपी भरें।
  4. स्क्रीन पर किस्तों का भुगतान स्टेटस और ई-केवाईसी, भूमि सीडिंग व आधार-बैंक सीडिंग की स्थिति देखें। तीनों शर्तें पूरी दिखनी चाहिए।

पोर्टल के विकल्पों के नाम और तरीका समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए स्क्रीन पर जो निर्देश दिखें उन्हीं का पालन करें। गांव स्तर पर लाभार्थियों की सूची पंचायत में भी लगाई जाती है, और पोर्टल पर गांववार सूची देखने की सुविधा है।

भाषा की दिक्कत हो तो सरकार का किसान-ई-मित्र चैटबॉट मदद करता है। पीआईबी के अनुसार यह हिंदी समेत 11 भाषाओं में 24 घंटे भुगतान, पंजीकरण और पात्रता से जुड़े सवालों के जवाब देता है।

पिछली किस्त छूट गई? यह नियम जानना जरूरी है

बहुत से किसान मान लेते हैं कि जो किस्त नहीं आई, वह हमेशा के लिए गई। आधिकारिक FAQ इससे अलग कहता है। अगर किसी पात्र किसान का नाम किसी चार-माही अवधि में पोर्टल पर अपलोड हो चुका है, और किसी कारण से — जैसे ई-केवाईसी या बैंक की गड़बड़ी — उसकी किस्त नहीं आई, तो वजह दूर होने पर उसे बकाया सभी किस्तें मिल सकती हैं। अपवाद सिर्फ वे मामले हैं जिन्हें एक्सक्लूजन नियमों के तहत अपात्र पाया गया हो।

लोकसभा के उत्तर में भी मंत्रालय ने कहा कि राज्यों द्वारा सत्यापित पात्र लाभार्थियों को “अगली किस्तों में” लाभ भेज दिया जाता है। मतलब — अगर आपकी पिछली किस्त अटकी थी, तो 24वीं किस्त से पहले कमियां दूर करना दोहरा फायदा दे सकता है।

शिकायत के लिए पीएम-किसान पोर्टल पर शिकायत का विकल्प है और CPGRAMS पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। पीआईबी के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में पोर्टल पर 24,605 शिकायतें दर्ज हुई थीं। जिन किसानों का नाम सूची में नहीं है, वे जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति से भी संपर्क कर सकते हैं।

पांच बातें जो हर किसान को याद रखनी चाहिए

  1. तारीख का इंतजार नहीं, तैयारी जरूरी है। 24वीं किस्त की तारीख घोषित नहीं हुई, लेकिन ई-केवाईसी, भूमि सीडिंग और आधार-बैंक लिंकिंग आज ही जांची जा सकती है।
  2. वायरल तारीख आधिकारिक नहीं है। 20 अक्टूबर सिर्फ अनुमान है; पुष्टि पीएम-किसान पोर्टल या पीआईबी से ही करें।
  3. चेहरे से भी ई-केवाईसी हो सकती है। ओटीपी या अंगूठे में दिक्कत हो तो पीएम-किसान ऐप का फेस ऑथेंटिकेशन विकल्प आजमाएं।
  4. अपात्र होकर पैसा लेना महंगा पड़ सकता है। आयकरदाता, सरकारी कर्मचारी (एमटीएस/ग्रुप-डी को छोड़कर) और ₹10,000+ मासिक पेंशन वाले परिवार योजना से बाहर हैं; वसूली की कार्रवाई होती है।
  5. छूटी किस्त लौट सकती है। अगर आप पात्र हैं और कमी दूर कर देते हैं, तो नियमों के तहत बकाया किस्तें भी मिल सकती हैं।

यह योजना किसानों के लिए क्यों मायने रखती है

₹2,000 की रकम छोटी लग सकती है, लेकिन बुवाई के मौसम में बीज-खाद के लिए यही नकदी काम आती है। पीआईबी ने कृषि मंत्रालय द्वारा प्रायोजित इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कृषि-आर्थिक अनुसंधान केंद्र के 2022 के एक अध्ययन का हवाला दिया है। उत्तर प्रदेश में किए गए इस अध्ययन के अनुसार, लाभार्थी किसानों के खेतों पर धान की पैदावार 3.08% और गेहूं की 1.93% ज्यादा पाई गई, और लाभार्थी परिवारों की खेती से आय 9.85% अधिक रही। यह एक राज्य का अध्ययन है, इसलिए इसे पूरे देश पर सीधे लागू नहीं माना जाना चाहिए — फिर भी यह दिखाता है कि समय पर मिली छोटी रकम भी खेती के फैसलों पर असर डालती है।

अगर आप खेती से जुड़ी दूसरी सरकारी मदद भी तलाश रहे हैं, तो जैविक खेती के लिए हमारी PKVY योजना पर विस्तृत जानकारी पढ़ें। सरकारी योजनाओं की आसान जानकारी के लिए हमारा लेख योजनाएं: “हर नागरिक तक हर योजना” भी देखें, और नई योजनाओं के अपडेट के लिए yojnaye.com का होम पेज देखते रहें।

आगे क्या होगा

आने वाले हफ्तों में इन बातों पर नजर रखें:

  • आधिकारिक घोषणा: पिछली बार किस्त जारी होने से दो दिन पहले, 18 जून 2026 को, पीआईबी ने कार्यक्रम की सूचना जारी की थी। 24वीं किस्त के लिए भी ऐसी ही सूचना का इंतजार करें।
  • अगस्त–नवंबर 2026-27 अवधि: पोर्टल के अब तक के अवधि-क्रम के आधार पर अनुमान है कि अगली किस्त इसी अवधि की गिनी जाएगी। यह कोई आधिकारिक कार्यक्रम नहीं है — असली तारीख सरकार की घोषणा से ही तय होगी।
  • राज्य स्तर पर सत्यापन: अगर आपका नया पंजीकरण या सुधार लंबित है, तो राज्य नोडल अधिकारी के सत्यापन के बाद ही नाम भुगतान सूची में जाएगा।
  • सैचुरेशन अभियान: सरकार समय-समय पर राज्यों के साथ मिलकर छूटे पात्र किसानों को जोड़ने के अभियान चलाती है; अपने ब्लॉक या पंचायत की सूचना पर ध्यान दें।

आज का सबसे जरूरी काम सीधा है — पोर्टल पर अपना स्टेटस खोलिए, ई-केवाईसी, भूमि सीडिंग और आधार-बैंक लिंक तीनों जांचिए, और कमी हो तो अभी ठीक करवाइए। तारीख और नियमों की पुष्टि के लिए हमेशा आधिकारिक पोर्टल pmkisan.gov.in पर ताजा जानकारी देखें।