स्वतंत्र एवं निष्पक्ष सरकारी योजना सूचना पोर्टल • 2026 अद्यतित संस्करण
सत्यापित सरकारी दिशानिर्देश • आधिकारिक मंत्रालय अधिसूचना पर आधारित

यूपी गोपालक योजना 2026: 10 दुधारू गाय-भैंस डेयरी फार्म हेतु ₹9 लाख तक लोन, ₹1.20 लाख अनुदान, ऐसे करें आवेदन

प्रकाशन: 10 अक्टूबर, 2026 • अद्यतित: 15 अक्टूबर, 2026 • लेखक: योजनाए संपादकीय टीम
यूपी गोपालक योजना 2026: 10 दुधारू गाय-भैंस डेयरी फार्म हेतु ₹9 लाख तक लोन, ₹1.20 लाख अनुदान, ऐसे करें आवेदन

उत्तर प्रदेश के बेरोजगार युवाओं और किसानों को दुग्ध उत्पादन और पशुपालन के माध्यम से स्थायी स्वरोजगार उपलब्ध कराने तथा राज्य में श्वेत क्रांति (White Revolution) को गति देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यूपी गोपालक योजना (UP Gopalak Yojana – Dairy Loan Scheme) का सफल संचालन किया जा रहा है। पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संचालित इस लोकप्रिय कल्याणकारी योजना के अंतर्गत 10 से 12 दुधारू गाय या भैंस की व्यावसायिक डेयरी स्थापित करने के लिए बैंकों के माध्यम से ₹9 लाख तक का आसान ऋण और राज्य सरकार द्वारा ₹1.20 लाख तक का एकमुश्त अनुदान (Subsidy) प्रदान किया जाता है।

इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें पशुपालक को 5-5 दुधारू पशु दो चरणों में खरीदने की छूट मिलती है, जिससे दूध उत्पादन चक्र सालभर निरंतर बना रहता है और किसान को घाटा नहीं होता। सरकार द्वारा ऋण पर ब्याज अनुदान के रूप में ₹1.20 लाख की राशि (प्रति वर्ष ₹24,000 की दर से 5 वर्षों में) सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में समायोजित की जाती है। आइए जानते हैं योजना के सभी नियम, पशुओं की नस्लें, सब्सिडी ढांचा, पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेज और पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के माध्यम से आवेदन की पूरी विधि।

यूपी गोपालक योजना: मुख्य विशेषताएं व हाइलाइट्स

प्रमुख पहलू आधिकारिक नियम व विवरण
योजना का नाम यूपी गोपालक योजना (UP Gopalak Dairy Loan Scheme)
संबंधित राज्य उत्तर प्रदेश (UP State Government)
नोडल विभाग पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन
स्वीकृत डेयरी इकाई आकार 10 से 12 दुधारू पशु (गाय अथवा भैंस)
अधिकतम बैंक ऋण राशि ₹9,00,000 (नौ लाख रुपये तक)
सरकारी अनुदान (Subsidy / Interest Subvention) कुल ₹1,20,000 (₹24,000 प्रति वर्ष 5 वर्षों तक)
स्वीकृत पशु नस्लें साहीवाल, गिर, थारपारकर, हरियाणा गाय एवं मुर्राह नस्ल की भैंस
न्यूनतम दूध उत्पादन मानक प्रति पशु न्यूनतम 10 लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन क्षमता
आधिकारिक पोर्टल animalhusb.up.gov.in / up.gov.in

योजना का मुख्य उद्देश्य

उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है। गोपालक योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • राज्य के शिक्षित और बेरोजगार ग्रामीण युवाओं को आधुनिक वैज्ञानिक डेयरी फार्मिंग से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना।
  • देसी उच्च नस्ल की दुधारू गायों (साहीवाल, गिर, थारपारकर) और मुर्राह भैंसों के संरक्षण व संवर्धन को प्रोत्साहित करना।
  • राज्य में शुद्ध दूध, घी, पनीर और मक्खन की उपलब्धता बढ़ाना तथा ग्रामीणों की नियमित मासिक आय में वृद्धि करना।
  • पशुपालकों को दूध के साथ-साथ गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद व बायो-गैस बनाकर अतिरिक्त कमाई करने के अवसर देना।

योजना के मुख्य लाभ व वित्तीय संरचना (Key Benefits & Subsidies)

यूपी गोपालक योजना के तहत पशुपालकों को निम्नलिखित व्यापक वित्तीय और तकनीकी लाभ मिलते हैं:

  • ₹9 लाख का आसान बैंक ऋण: 10 दुधारू पशुओं की खरीद और आधुनिक कैटल शेड निर्माण हेतु बैंकों द्वारा ₹9 लाख तक का रियायती ऋण स्वीकृत किया जाता है।
  • ₹1.20 लाख की सीधी सरकारी सब्सिडी: नियमित ऋण चुकाने वाले गोपालक को सरकार द्वारा प्रति वर्ष ₹24,000 की दर से 5 वर्षों में कुल ₹1,20,000 की ब्याज सब्सिडी सीधे बैंक खाते में दी जाती है।
  • दो चरणों में पशु खरीद की सुविधा: योजना के तहत पहले चरण में 5 पशु खरीदे जाते हैं। जब वे दूध देना कम करते हैं, तब दूसरे चरण में 5 नए दुधारू पशु खरीदे जाते हैं, जिससे डेयरी फार्म का दुग्ध उत्पादन साल के 365 दिन निर्बाध जारी रहता है।
  • निःशुल्क पशु चिकित्सा और कृत्रिम गर्भाधान: पशुपालन विभाग के स्थानीय पशु चिकित्सालय द्वारा सभी पशुओं का निःशुल्क टीकाकरण, डी-वर्मिंग और उन्नत नस्ल सुधार कृत्रिम गर्भाधान (AI) किया जाता है।
  • पशु बीमा सुरक्षा: खरीदे गए सभी पशुओं का राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत रियायती दरों पर 3 वर्ष का बीमा कराया जाता है, जिससे किसी बीमारी या आकस्मिक मृत्यु पर वित्तीय जोखिम समाप्त हो जाता है।

पात्रता के विस्तृत नियम (Eligibility Criteria)

  1. आवेदक उत्तर प्रदेश का मूल व स्थायी निवासी होना चाहिए और उसकी न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा अधिकतम 55 वर्ष होनी चाहिए।
  2. आवेदक बेरोजगार होना चाहिए और उसके परिवार की कुल वार्षिक आय ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  3. आवेदक के पास 10 से 12 पशुओं को रखने के लिए उपयुक्त पक्का या अर्ध-पक्का पशु बाड़ा (Cattle Shed) होना चाहिए अथवा उसके पास शेड बनाने के लिए पर्याप्त निजी जमीन उपलब्ध होनी चाहिए।
  4. आवेदक के पास पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था हेतु कम से कम 1 से 2 एकड़ कृषि योग्य भूमि (स्वयं की या लीज पर) उपलब्ध होनी चाहिए।
  5. आवेदक को पहले से कम से कम 5 दुधारू पशु पालने का व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए।
  6. आवेदक किसी भी बैंक अथवा वित्तीय संस्थान का डिफाल्टर नहीं होना चाहिए।

आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट (Required Documents)

  • आधार कार्ड और पैन कार्ड: पहचान व वित्तीय सत्यापन हेतु।
  • निवास प्रमाण पत्र: उत्तर प्रदेश का मूल निवास प्रमाण पत्र, बिजली बिल या राशन कार्ड।
  • आय प्रमाण पत्र: तहसीलदार द्वारा जारी अधिकतम ₹1 लाख का आय प्रमाण पत्र।
  • भूमि के राजस्व दस्तावेज: चारे की जमीन और कैटल शेड के लिए खसरा-खतौनी की नकल।
  • पशुपालन अनुभव प्रमाण पत्र: स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी (Veterinary Officer) द्वारा जारी प्रमाण पत्र कि आवेदक पशुपालन में अनुभवी है।
  • सक्रिय बैंक पासबुक: आधार-लिंक्ड बैंक खाता विवरण और आईएफएससी कोड।
  • विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR / Project Report): पशुओं की लागत, शेड निर्माण और अपेक्षित दुग्ध बिक्री का विवरण।
  • पासपोर्ट साइज फोटो और मोबाइल नंबर।

आवेदन प्रक्रिया: ऑफलाइन व ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step)

यूपी गोपालक योजना के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया मुख्य रूप से जिला पशुपालन विभाग के माध्यम से संपन्न होती है:

चरणबद्ध आवेदन प्रक्रिया

  1. अपने नजदीकी राजकीय पशु चिकित्सालय (Government Veterinary Hospital) अथवा जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (Chief Veterinary Officer – CVO) के कार्यालय में जाएं।
  2. वहां से यूपी गोपालक योजना का आधिकारिक आवेदन पत्र निःशुल्क प्राप्त करें (अथवा animalhusb.up.gov.in से डाउनलोड करें)।
  3. आवेदन पत्र में अपना नाम, पता, पारिवारिक आय, उपलब्ध जमीन का रकबा और प्रस्तावित पशुओं (गाय/भैंस) की नस्ल भरें।
  4. आधार कार्ड, निवास प्रमाण, आय प्रमाण, खतौनी और अनुभव प्रमाण पत्र की स्व-प्रमाणित प्रतियां संलग्न करें।
  5. पूर्ण रूप से भरे हुए आवेदन को अपने क्षेत्र के पशु चिकित्सा अधिकारी (पशु डॉक्टर) से सत्यापित करवाकर सीवीओ कार्यालय में जमा करें।
  6. जिला स्तरीय चयन समिति (जिसकी अध्यक्षता सीडीओ या सीवीओ करते हैं) द्वारा आवेदनों की समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण किया जाता है।
  7. समिति की संस्तुति के बाद आवेदन को संबंधित बैंक शाखा (SBI, PNB, ग्रामीण बैंक आदि) को ऋण संस्वीकृति हेतु भेजा जाता है। बैंक द्वारा लोन जारी होते ही पशु खरीदे जाते हैं और सब्सिडी प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है।

आवेदन की स्थिति कैसे चेक करें? (Status Tracking)

आवेदक अपने जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) कार्यालय अथवा संबंधित बैंक शाखा में जाकर अपने आवेदन के सत्यापन, समिति अनुमोदन और लोन संवितरण की अद्यतन स्थिति जान सकते हैं।

कृषि वित्त और किसान कल्याण से जुड़े अन्य उपयोगी लेखों के लिए हमारे पोर्टल पर उपलब्ध किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के विस्तृत मार्गदर्शक लेख भी अवश्य पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: क्या केवल 5 पशु रखकर भी योजना का लाभ लिया जा सकता है?
उत्तर: गोपालक योजना का मानक ढांचा 10 पशुओं के व्यावसायिक फार्म के लिए है। यदि कोई किसान कम पशु रखना चाहता है, तो पशुपालन विभाग की मिनी-डेयरी योजना या KCC पशुपालन योजना के तहत 2 से 5 पशुओं के लिए भी अलग से ऋण और सब्सिडी का लाभ ले सकता है।

प्रश्न 2: पशु खरीदने के लिए पैसे कैसे मिलते हैं?
उत्तर: बैंक ऋण की राशि सीधे आवेदक को नकद नहीं दी जाती, बल्कि पशुपालन विभाग की खरीद समिति और बैंक प्रतिनिधि की उपस्थिति में पशु मेले या अधिकृत प्रजनक से पशु खरीदे जाते हैं और भुगतान सीधे विक्रेता को आरटीजीएस/चेक द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 3: क्या दूध बेचने के लिए पराग या अमूल डेयरी से टाई-अप कराया जाता है?
उत्तर: हां, दुग्ध विकास विभाग द्वारा गोपालकों को स्थानीय दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति (पराग डेयरी / पीसीडीएफ) अथवा निजी डेयरियों से जोड़ दिया जाता है, जिससे उचित समर्थन मूल्य पर रोजाना दूध की बिक्री सुनिश्चित होती है।

आधिकारिक स्रोत व हेल्पलाइन (Official Sources & Helpline)

आधिकारिक वेबसाइट: animalhusb.up.gov.in / up.gov.in
पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, गोकरननाथ रोड, लखनऊ
पशुपालन निदेशालय टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-180-5141
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन उत्तर प्रदेश: 1076