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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2026: ड्रिप व स्प्रिंकलर पर 55% सब्सिडी, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

प्रकाशन: 10 अक्टूबर, 2026 • अद्यतित: 15 अक्टूबर, 2026 • लेखक: योजनाए संपादकीय टीम
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2026: ड्रिप व स्प्रिंकलर पर 55% सब्सिडी, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

देश के प्रत्येक कृषि योग्य खेत तक सुनिश्चित सिंचाई सुविधा पहुंचाने और जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों से अधिकतम करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY – Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana) का सफल संचालन किया जा रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में संचालित यह बहु-विभागीय अम्ब्रेला योजना दो प्रमुख राष्ट्रीय आदर्श वाक्यों—‘हर खेत को पानी’ (Har Khet Ko Pani) और ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (Per Drop More Crop – PDMC) पर आधारित है।

इस योजना के अंतर्गत किसानों को ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) और स्प्रिंकलर सिंचाई (Sprinkler Irrigation) उपकरण लगाने के लिए लागत का 45% से लेकर 55% तक का भारी सरकारी अनुदान (Subsidy) सीधे उनके बैंक खाते में प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही खेतों में वर्षा जल संचयन हेतु खेत-तालाब (Farm Ponds), चेक डैम और नलकूप निर्माण के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाती है। आइए जानते हैं योजना के चारों प्रमुख घटक, सब्सिडी के नियम, पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और ऑनलाइन आवेदन की पूरी विधि।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: मुख्य विशेषताएं व हाइलाइट्स

प्रमुख पहलू आधिकारिक नियम व विवरण
योजना का नाम प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)
प्रमुख आदर्श वाक्य ‘हर खेत को पानी’ एवं ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (Per Drop More Crop)
संयुक्त नोडल मंत्रालय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय
सूक्ष्म सिंचाई अनुदान (लघु/सीमांत किसान) इकाई लागत का 55% तक प्रत्यक्ष सरकारी अनुदान (Drip/Sprinkler Subsidy)
सूक्ष्म सिंचाई अनुदान (अन्य बड़े किसान) इकाई लागत का 45% तक सरकारी अनुदान
प्रमुख घटक AIBP, HKKP (हर खेत को पानी), PDMC (प्रति बूंद अधिक फसल), WDC (वाटरशेड विकास)
जल बचत क्षमता पारंपरिक सिंचाई की तुलना में 40% से 50% तक पानी की बचत
उत्पादकता में वृद्धि फसल पैदावार में 30% से 40% तक की बढ़ोतरी
आधिकारिक पोर्टल pmksy.gov.in / dbtagriculture (संबंधित राज्य पोर्टल)

योजना का मुख्य उद्देश्य

भारत में खेती योग्य भूमि का एक बड़ा हिस्सा आज भी वर्षा पर निर्भर (Rainfed) है, जिससे सूखे या कम वर्षा की स्थिति में किसानों की मेहनत बर्बाद हो जाती है। PMKSY के मूल उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • सिंचाई कवरेज का विस्तार करना और देश के प्रत्येक कोने में अंतिम छोर तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • सूक्ष्म सिंचाई (माइक्रो-इरिगेशन) को बढ़ावा देकर जल के अंधाधुंध अपव्यय को रोकना।
  • ड्रिप सिंचाई के माध्यम से उर्वरकों को सीधे पौधों की जड़ों में पहुंचाना (Fertigation), जिससे उर्वरक की खपत घटे और लागत में बचत हो।
  • वाटरशेड प्रबंधन के माध्यम से वर्षा जल का संचयन करना और गिरते भूजल स्तर (Groundwater Level) को रिचार्ज करना।
  • किसानों की फसल उत्पादन लागत में भारी कमी लाकर उनकी शुद्ध कृषि आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना।

योजना के चार प्रमुख घटक (Four Core Components)

PMKSY के अंतर्गत जल आपूर्ति से लेकर खेत स्तर तक जल दक्षता के लिए चार रणनीतिक घटकों का संचालन किया जाता है:

1. त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP – Accelerated Irrigation Benefit Programme)

जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित इस घटक के तहत देश की अधूरी पड़ी प्रमुख और मध्यम बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजनाओं, नहरों और बांधों को तेजी से पूरा करके लाखों हेक्टेयर नए कमान क्षेत्र में नहरी पानी पहुंचाया जाता है।

2. हर खेत को पानी (HKKP – Har Khet Ko Pani)

इसके अंतर्गत लघु सिंचाई (Minor Irrigation), कमान क्षेत्र विकास (CAD), पारंपरिक जल निकायों (तालाबों, बावड़ियों, पोखरों) का जीर्णोद्धार और भूजल विकास कार्य किए जाते हैं ताकि किसानों को उनके नजदीकी स्रोतों से सिंचाई का जल मिल सके।

3. प्रति बूंद अधिक फसल (PDMC – Per Drop More Crop)

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित यह घटक सीधे व्यक्तिगत किसान के खेत पर केंद्रित है। इसमें ड्रिप (टपक) सिंचाई प्रणाली और स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई प्रणाली की स्थापना के लिए भारी सब्सिडी दी जाती है। इससे पानी की हर बूंद का अधिकतम उपयोग होता है।

4. वाटरशेड विकास घटक (WDC – Watershed Development Component)

भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित इस घटक में मिट्टी और जल संरक्षण, चेक डैम निर्माण, मेड़बंदी, खेत-तालाब और वृक्षारोपण के माध्यम से वर्षा जल को संरक्षित किया जाता है।

योजना के मुख्य लाभ व वित्तीय सहायता (Key Benefits)

केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर किसानों को आधुनिक सिंचाई यंत्रों पर भारी अनुदान देती हैं:

  • छोटे व सीमांत किसान (Small & Marginal Farmers – 2 हेक्टेयर तक भूमि): कुल उपकरण लागत का 55% अनुदान मिलता है। किसान को केवल 45% हिस्सा ही स्वयं लगाना होता है।
  • सामान्य व बड़े किसान (Other Farmers – 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि): कुल उपकरण लागत का 45% अनुदान मिलता है।
  • अनुसूचित जाति / जनजाति (SC/ST) व महिला किसान: कई राज्यों में राज्य सरकारें अपने बजट से अतिरिक्त 10-15% टॉप-अप सब्सिडी देती हैं, जिससे कुल अनुदान 70% से 80% तक पहुंच जाता है।

पात्रता के विस्तृत नियम (Eligibility Criteria)

  1. आवेदक भारत का स्थायी निवासी किसान होना चाहिए और उसके पास स्वयं के नाम पर वैध कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए।
  2. पट्टेदार (लीज) या बटाईदार किसान भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उनके पास भूमि मालिक का कम से कम 7 से 10 वर्ष का पंजीकृत पट्टा अनुबंध हो।
  3. खेत पर सिंचाई के लिए पानी का एक स्थायी स्रोत (जैसे ट्यूबवेल, कुआं, बोरवेल, नहर, फार्म पॉन्ड या नदी) उपलब्ध होना अनिवार्य है।
  4. किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG), सहकारी समितियां और जल उपभोक्ता संघ (WUA) भी सामूहिक सूक्ष्म सिंचाई के लिए पात्र हैं।
  5. आवेदक ने पिछले 5 से 7 वर्षों के भीतर उसी भूमि के लिए सूक्ष्म सिंचाई पर सरकारी सब्सिडी का लाभ न लिया हो।

आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट (Required Documents)

  • आधार कार्ड: किसान का आधार कार्ड (पहचान व डीबीटी हेतु)।
  • भूमि के राजस्व दस्तावेज: चालू खसरा-खतौनी, जमाबंदी या भू-अभिलेख पासबुक की नकल।
  • जल स्रोत का प्रमाण पत्र: निजी बोरवेल, ट्यूबवेल या विद्युत कनेक्शन का बिल/प्रमाण पत्र।
  • सक्रिय बैंक पासबुक: आधार-लिंक्ड बैंक खाता विवरण (आईएफएससी कोड व खाता संख्या)।
  • पंजीकृत विक्रेता से कोटेशन (Quotation): कृषि विभाग द्वारा सूचीबद्ध अधिकृत ड्रिप/स्प्रिंकलर निर्माता कंपनी का अनुमानित लागत कोटेशन।
  • पासपोर्ट साइज फोटो और मोबाइल नंबर।

आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन व ऑफलाइन आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step)

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PDMC घटक) के तहत सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों पर सब्सिडी पाने के लिए अधिकांश राज्यों में कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था है:

विधि 1: राज्य कृषि डीबीटी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन

  1. अपने राज्य के आधिकारिक कृषि विभाग डीबीटी पोर्टल (जैसे UP Agriculture dbt, Bihar DBT Agriculture, Rajkisan Sathi, MP e-Krishi Anudan आदि) पर जाएं।
  2. ‘सूक्ष्म सिंचाई / ड्रिप-स्प्रिंकलर अनुदान’ लिंक पर क्लिक करें।
  3. अपना किसान पंजीकरण संख्या (Farmer Registration ID) अथवा आधार नंबर दर्ज करें।
  4. अपनी फसल का प्रकार (बागवानी, फल, सब्जियां, नकदी फसल, खाद्यान्न) और खेत का रकबा (हेक्टेयर में) चुनें।
  5. सिंचाई उपकरण का प्रकार चुनें—ड्रिप इरिगेशन सिस्टम अथवा स्प्रिंकलर सिस्टम (मिनी/माइक्रो/पोर्टेबल स्प्रिंकलर)।
  6. विभाग द्वारा अनुमोदित कंपनियों की सूची में से अपनी पसंद की निर्माता कंपनी और स्थानीय डीलर का चयन करें।
  7. खसरा-खतौनी, बैंक पासबुक और कोटेशन की स्कैन कॉपी अपलोड करके फॉर्म सबमिट करें।
  8. आवेदन स्वीकृत होने पर विभाग द्वारा ‘प्रशासनिक स्वीकृति’ (Administrative Sanction) जारी की जाती है।
  9. अधिकृत कंपनी का तकनीशियन आपके खेत पर आकर सिस्टम स्थापित करता है, जिसके बाद कृषि विभाग के अधिकारी स्थलीय भौतिक सत्यापन (GPS जियो-टैग निरीक्षण) करते हैं। सत्यापन रिपोर्ट अपलोड होते ही सब्सिडी सीधे किसान के बैंक खाते में या किसान की सहमति से निर्माता कंपनी को अंतरित कर दी जाती है।

विधि 2: जिला उप-कृषि निदेशक / उद्यान विभाग में ऑफलाइन आवेदन

किसान अपने जिले के उप-कृषि निदेशक (DDA) या जिला उद्यान अधिकारी (District Horticulture Officer – DHO) के कार्यालय में जाकर भी ऑफलाइन आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं।

आवेदन की स्थिति कैसे चेक करें? (Status Tracking)

अपने राज्य के कृषि पोर्टल पर ‘आवेदन की स्थिति / टोकन व्यवस्था’ मेन्यू पर जाएं, अपना आधार नंबर या आवेदन संख्या दर्ज करें। आपके आवेदन की समीक्षा, फील्ड वेरिफिकेशन और सब्सिडी जारी होने की वर्तमान स्थिति स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगी।

कृषि उन्नति और जैविक खेती से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण लेखों के लिए हमारे पोर्टल पर उपलब्ध पीएम किसान सम्मान निधि योजना और परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के विस्तृत विवरण भी अवश्य पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: ड्रिप सिंचाई लगाने से फसल को क्या फायदा होता है?
उत्तर: ड्रिप सिंचाई में पानी सीधे पौधों की जड़ों में बूंद-बूंद करके टपकता है। इससे पानी की 50% से अधिक बचत होती है, खरपतवार (Weeds) नहीं उगते, कीटनाशकों और खादों की 30% बचत होती है तथा फसल की पैदावार में 30% से 40% तक की भारी बढ़ोतरी होती है।

प्रश्न 2: स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई किन फसलों के लिए सबसे अच्छी है?
उत्तर: स्प्रिंकलर सिंचाई गेहूं, चना, सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, मटर, बाजरा और दालों जैसी फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है, विशेषकर असमतल और रेतीली भूमि पर।

प्रश्न 3: क्या खेत-तालाब (Farm Pond) बनवाने के लिए भी अनुदान मिलता है?
उत्तर: हां, PMKSY के वाटरशेड घटक और राज्य योजनाओं के तहत अपने खेत में पक्के या कच्चे तालाब के निर्माण हेतु ₹50,000 से लेकर ₹1,00,000 तक की वित्तीय सहायता अलग से दी जाती है।

आधिकारिक स्रोत व हेल्पलाइन (Official Sources & Helpline)

आधिकारिक वेबसाइट: pmksy.gov.in
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय: agricoop.gov.in
किसान कॉल सेंटर राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-180-1551
जल संसाधन एवं जल शक्ति मंत्रालय: jalshakti-dowr.gov.in